10 फ़रवरी 2021 - 12:06
अमेज़न-अंबानी के बीच विवाद, विदेशी इन्वेस्टर्ज़ की भारत पर एहतियात भरी नज़र, दोनों की है 1 ट्रिलियन के ख़ुदरा बाज़ार पर नज़र

दुनिया के दो सबसे ज़्यादा पैसे वालों मुकेश अंबानी और जेफ़ बेज़ोस के बीच भारत की 1 ट्रिलियन की ख़ुदरा बाज़ार पर क़ब्ज़ा जमाने के लिए जारी कशमकश, विदेशी इन्वेस्टर्ज़ के सब्र को टेस्ट कर रही है।

इसी हफ़्ते अमेज़न डॉट कॉम इन्क की, मुकेश अंबानी की रिलायंस इन्डस्ट्रीज़ लिमिटेड को फ़्यूचर रिटेल लिमिटेड की संपत्ति को ख़रीदने से रोकने के लिए, क़ानूनी कार्यवाही में नया मोड़ आया है। पिछले हफ़्ते नई दिल्ली में हाई कोर्ट के एक जज ने फ़्यूचर ग्रुप को संपत्ति बेचने से रोका। सोमवार को हाई कोर्ट के जजों की टीम ने इस फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया।

अमेज़न इस ताज़ा फ़ैसले के ख़िलाफ़ भारत के सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी।

इस मामले पर पैनी नज़र, इन्वेस्टर्ज़ के लिए एक अहम क़ानूनी मिसाल क़ायम कर सकता है कि क्या भारत में विदेशी मध्यस्थ के फ़ैसले की कोई हैसियत है या नहीं। अमेज़न ने भारतीय अदालत में सिंगापूर की एमरजेन्सी में मध्यस्थता करने वाली कोर्ट के ऑर्डर के साथ अर्ज़ी दाख़िल की जिसमें फ़्यूचर रिटेल को रिलायंस के साथ सौदा करने से रोका गया था।

 

इससे विदेशी निवेशकों को भारत में समझौतों की मान्यता को आंकने में  मदद मिलेगी, इस बात के मद्देनज़र कि वर्ल्ड बैंक ने भारत को समझौतों को लागू करने की नज़र से दुनिया के सबसे पिछड़े 15 फ़ीसद देशों में वेनेज़ोएला, सीरिया और सेनेगल से भी नीचे रखा है।

 

सिंगापूर आदेश

 

अक्तूबर में अमेज़न-फ़्यूचर रिटेल केस में सिंगापूर एमरजेन्सी मध्यस्थ कोर्ट ने फ़्यूचर ग्रुप को रिलायंस से सौदा रोकने का आदेश दिया। अमेज़न ने फ़्यूचर ग्रुप कंपनी के साथ, ग्राहकों की वफ़ादारी को बढ़ावा देने के लिए अपनी भागीदारी के समझौते का हवाला दिया जिसने इस ग्रुप को मुकेश अंबानी की कंपनी को संपत्ति बेचने से रोका और सिंगापूर में मध्यस्थ कोर्ट को इस विवाद को हल करने की इजाज़त दी।

पिछले हफ़्ते हाई कोर्ट के एक जज ने इस समझौते को रोका और कहा कि उन्हें लगता है कि सिंगापूर की एमरजेन्सी मध्यस्थ कोर्ट का आदेश भारत में मान्य है और उसे यहाँ लागू किया जा सकता है। फ़्यूचर ग्रुप की अपील पर दो जजों के पैनल ने डील की इजाज़त दे दी यह कहते हुए कि फ़्यूचर रिटेल, अमेज़न और फ़्यूचर कूपन्ज़ प्राइवेट के बीच हुए समझौते का हिस्सा नहीं थी। जजों ने सोमवार को कहा कि इस केस की विस्तार से सुनवाई 26 फ़रवरी से शुरू होगी।

पिछले हफ़्ते के आदेश से विदेशी इन्वेस्टर्ज को, भारत में मध्यस्थ व्यवस्था के लागू होने की ओर से कुछ राहत मिली होगी, लेकिन सोमवार को अमेज़न के ख़िलाफ़ पास हुए आदेश से, नई चिंता पैदा होगी। यह कहना है पनाग ऐन्ड बाबू लॉ कंपनी के भागीदार समुद्र सारंगी का। “सुप्रीम कोर्ट में अपील अब अपरिहार्य लगती है।” (MAQ/N)

साभारः अल्जज़ीरा

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